शशि ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत हिन्दी दैनिक ‘आज’ से की. उनके समय में इस अखबार का विस्तार समूचे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में हुआ. ‘आज’ के बाद वह एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के रूप में प्रमुख न्यूज चैनल ‘आजतक’ से जुड़े और इसके न्यूज कंटेंट और वीकेंड प्रोग्रामों को शक्ल देने में महती भूमिका निभाई. एक प्रतिष्ठित पत्रकार, शशि शेखर से बातचीत में उन्होंने विभिन्न पहलुओं पर हमसे बात की.


अगर भारत में हिन्दी और अंग्रेजी अखबार की पत्रकारिता की तुलना या समीझा करनी हो, तो आप कैसे करेंगे? दोनों अपनी जगह बेहतर पत्रकारिता कर रहे हैं याकहीं एक तरफ पलड़ा भारी है?

मैं इस तुलना को उचित नहीं मानता. दोनों का पाठक वर्ग अलग है और उनकी आवश्यकताएं भी. दिल्ली के लोगों के लिए मेट्रो का बेवजह रुका रहना याट्रेफिक जाम बड़ी खबर हो सकती है. जबकि एक आदिवासी बहुल इलाके में भुखमरी. हम सब अपने पाठक वर्ग को ध्यान में रखकर अखबार निकालते हैं. लिहाजा यह तुलना निरर्थक है.

क्या आप इस बात से सहमत हैं कि इंडियन एक्सप्रेस या टेलिग्राफ की तरह हिन्दी में कोई अखबार रिपोर्टिंग नहीं कर रहा है?

मैं किसी अखबार विशेष पर टिप्पणी नहीं करना चाहता.

भारत के आपके सबसे पसंदीदा चार अखबार कौन-कौन से हैं?

‘हिन्दुस्तान’, ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ और ‘मिंट’. चौथे की खोज जारी है.

आप लगातार यूथ को अपने संस्थान में काम करने का मौका देते हैं। क्या आप किन्हीं दो ऐसे युवाओं के बारे में बता सकते हैं, जो बीते सालों में आपके पास नौकरीके लिए आया हो और आपने उनमें सबसे अलग टैलेंट देखा हो और जो आज भी आपको याद हो ?

हां, एक नौजवान ऐसा आया, जिससे मैंने यह सवाल किया कि आप इस प्रोफेशन में दस से पंद्रह वर्षों में खुद को कहां पाते हैं? उसने मेरी ओर इशारा किया और कहा कि आपकी कुर्सी पर. मैंने उसे तत्काल अपनी टीम में शामिल कर लिया. उसे प्रेरित भी करता रहा पर वह बहुत जल्दी निराश हो गया. सपने देखना औरउन्हें अमलीजामा पहनाना दो अलग विशिष्टताएं हैं.

एक लड़की, जो एक किसान परिवार से आती थी, उसने लखनऊ में मुझसे कहा कि मैं खोजी पत्रकार बनना चाहती हूं. उसने कई अच्छी खबरें कीं. बाद में उसकाविवाह हो गया और अब वह कभी-कभी अपनी छोटी बच्ची को लेकर रिपोर्टिंग पर चली जाती है. मैं उसके जज्बे को सलाम करता हूं.

आमतौर पर जो युवा आपके संस्था के साथ काम शुरू करते हैं, उनमें आप क्या खूबियां और क्या बड़ी कमियां देखते हैं?

उनमें वे सारी खूबियां और खामियां होती हैं, जो अधिकतर नौजवानों में पाई जाती हैं. मसलन, वे शुरुआत तो अच्छी करते हैं, पर उनमें से ज्यादातर बीच राह अपनी महत्वाकांक्षाओं को बेतुका मानने लगते हैं. इसके अलावा गंभीर अध्ययन का अभाव है और भाषाई अज्ञानता भी बढ़ती जा रही है.

आपको इतने साल पत्रकारिता करने के बाद भी, उर्जा कहां से मिलती है? किन चीजों से आप इंस्पायर होते हैं?

प्रकृति से.

ज्यादातर चीजें क्या रुटीन में आप करते हैं या फिर हर दिन का एक अलग रोमांच होता है?

मुझे खबरें बहुत रोमांचित करती हैं. अपने पहले पन्ने को खुद डिजाइन करवाना, खबरों के लिए अच्छे शीर्षक सुझाना और कॉलम लिखने से पहले हर हफ्तेजो अकुलाहट होती है, इन्हीं सबसे मुझे ऊर्जा मिलती है.

आपने एक बुक फेयर के मंच से कहा था कि आप पर कभी कोई दबाव नहीं होता. लेकिन फैक्ट तो ये है कि सरकारें मीडिया पर दबाव डालती है?  बाजार से भी ऐसादबाव रहता है कि सीरियस जर्नलिज्म के लिए स्पेस कम बचता है?

मैं ऐसा नहीं मानता. कुछ लोगों ने यह प्रवाद खुद को गंभीर सवालों से बचाए रखने के लिए फैलाया है.

इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भारत में बेहद कम स्पेस क्यों है?

यदि खोजी पत्रकारों को समुचित धन मिलने लगे तो यह दूर हो जाए. आज नहीं तो कल ऐसा अवश्य होगा.

क्या वर्तमान केंद्र सरकार की ओर से बीते तीन सालों में कोई करप्शन नहीं हुआ? क्या पत्रकारों या संपादकों की ओर से पर्याप्त इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म हुआ है? सरकार के काम काज को लेकर ?

यकीनन। अभी तक किसी के हाथ कोई प्रमाण नहीं लगा है. और तो और घात लगाए बैठे विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर चुप हैं.

अपने परिवार के बारे में बताएं, कौन-कौन हैं और क्या करते हैं ?

मेरी पत्नी होम मेकर हैं, पुत्री डेंटल सर्जन और पुत्र एक कॉरपोरेट में मैनेजर हैं.

अभी कितने साल आपकी नौकरी करने की योजना है ?

पता नहीं.

आप अपनी प्रोफेशनल करिअर में सबसे अधिक परेशान कब-कब हुए और उनका हल कैसे निकाला?

मुझे मेरा प्रोफेशन आनंद देता है, परेशानी नहीं.

आपके करिअर के दो सबसे बड़े टर्निंग प्वाइंट क्या थे ?

पहला 1984 में, जब मुझे संपादक बनाया गया और दूसरा 2000 में, जब मैंने ‘आज’ छोड़ने का निर्णय किया.

आपके प्रोफेशनल करिअर में सबसे अधिक खुशी आपको कब-कब मिली ?

जब भी किसी अच्छी खबर पर काम करने अथवा किसी दिलचस्प मुद्दे पर लिखने का मौका मिला.

आपके शौक क्या-क्या हैं?

मेरा एक ही शौक है, दुनिया भर के प्राकृतिक स्थलों में घूमना.

आपने किन-किन देशों का दौरा किया है ?

लगभग सभी प्रमुख देशों में गया हूं.

क्या कभी किसी बाहर के देश में बसने का मन नहीं हुआ ?

कभी नहीं.

आप युवा जर्नलिस्ट्स और जर्नलिज्म के स्टूडेंट्स को क्या मेसेज देना चाहेंगे?

यह एक अच्छा प्रोफेशन है, इसे इसकी अच्छाई के साथ स्वीकार कर निष्ठापूर्वक कार्य कीजिए.

 

ये भी पढ़ें-

श्वेता सिंह, आज तक एंकर: फिल्में बनाना चाहती थीं, लेकिन बनी न्यूज एंकर


This interview is taken via mail by @AlokAnand To suggest an interview, feedbacks, comments, work with us, write at alok@acadman.in

Hey, are you a student of Journalism? Please share your internship experiences HERE. It will certainly help other students.