कशिश न्यूज में इनपुट हेड के रूप में काम कर रहे संतोष सिंह से हमने पत्रकार और पत्रकारिता के बारे में जानने की कोशिश की है. पत्रकारिता में अपने बीस सालोंं के अनुभव को उन्होंने acadman.in साथ बड़ी बेबाकी से साझा किया है. उन्होंने पत्रकारिता के ग्रे एरियाज पर भी खुलकर अपना मत रखा है.

एक अच्छा पत्रकार बनने के लिए पत्रकारिता में डिग्री की क्या भूमिका है?

पत्रकारिता की पढ़ाई को लेकर मेरा मानना यह है कि पढ़ाई के रुप में जो कोर्स स्टडी होता है और मीडिया में जो प्रेक्टिकल अनुभव है, जो कम हम रोजाना कर रहे हैं. इन दोनों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है. लेकिन नौकरी के लिए आप के पास 1 डिग्री होना जरूरी है. जहां तक मेरी बात है, मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई, पत्रकारिता में आने के बाद की है. क्योंकी आगे बढ़ने के लिए एक डिग्री की जरूरत होती है.

मेरा मानना है कि पत्रकारिता की पढ़ाई बच्चों में पत्रकारिता की तरफ एक ललक पैदा करती है. पढ़ाई के दौरान आपकी कई बड़े पत्रकारों से मुलाकात होती है. ट्रेनिंग के दौरान भी पत्रकारों के काम को देखने का मौका मिलता है. लेकिन इसका नुकसान यह होता है कि जो नए बच्चे पत्रकारिता में ग्लैमर देखने लगते हैं. इससे वे बेसीक पत्रकारिता से डाइवर्ट हो जाते हैं. यहां ग्लैमर तो है. जैसे – किसी नेता के पास आप आसानी से पहुंच सकते हैं. आपको सम्मान मिलता है. पत्रकारिता अभी जिस दौर में है, आप पैसों के सहारे भी पत्रकारिता कर सकते हैं.

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मीडिया में इंटर्नशिप कितना फायदेमंद है?  किसी बड़े संस्थान से इंटर्नशीप कितना जरूरी है?

जब आप इंटर्नशिप करने आते हैं, तो आपको व्यवहारिक जानकारी मिलती है. प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कई चीज ऐसी है जिस से आप रूबरू होते हैं. इंटर्नशिप के दौरान आप प्रैक्टीकल तौर पर चीजों को देखते हैं. इंटरव्यू कैसे लिया जाता है. न्यूज़ कलेक्ट कैसे होता है. इस सबका आप खुद अनुभव करते हैं. यह अनुभव आपके पढ़ाई के ठीक उलट है. इसलिए इंटर्नशिप बहुत जरूरी है. इंटर्नशिप के लिए संस्थान चयन करते समय इस बात का ध्यान रखें कि संस्थान ऐसा हो जहां आप अपने आपको एक्सप्लोर कर पायें. इसके लिए संस्थान का बड़ा होना मायने नहीं रखता है. मान लीजिए किसी छोटी संस्थान से भी आप इंटर्नशिप कर रहे हैं, जहां आपको चीजें सीखने का मौका मिल रहा है, तो वहां जरूर जाइए. बड़े मीडिया हाउस में जाना जरूरी नहीं है. जहां आप को मौका मिला वही सही है.

आप अपने पत्रकारिता में अपने सफ़र के बारे में बताइए. आपको पहली नौकरी कहां मिली?

मैंने प्रिंट मीडिया में प्रभात खबर से शुरू किया था. इसके बाद दैनिक जागरण में आ गया. कुछ दिनों के लिए हिंदुस्तान में भी काम किया. इसके बाद 12 साल तक ETV में रहा.

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संतोष सिंह

ETV में आपका अनुभव कैसा रहा?

अभी के दौर में पत्रकारिता जगत का सबसे बेस्ट ऑर्गेनाइजेशन ETV है. इस संस्थान में पत्रकारिता करने का सबसे ज्यादा मौका मिलता है और काम सिखने के भी अनेकों मौके मिलते हैं. अगर आप ETV में काम कर रहे हैं तो रिपोर्टिग से लेकर एडिटिंग के लिए विजुअल भेजने तक का काम आपको ही करना होता है. पैकेज लिखने का काम भी आपका ही होता है. अगर आप दूसरी जगह हैं तो आपको इतने मौके नहीं मिलते है. इससे आपको यह नहीं पता चल पाता है कि न्यूज़ कैसे बनाते हैं. एक आर्गेनाईजेशन के रूप में ETV  सबसे बढ़िया है.

तो आपने ETV क्यूँ छोड़ दिया?

देखिए, मैं संस्थान बदलने के मूड में नहीं था. लेकिन अचानक कुछ खबर को लेकर मैनेजमेंट और मेरे बीच तनाव की स्थिति इतनी बढ़ गई कि मेरा ट्रांसफर हैदराबाद कर दिया गया. फिर नेगोशियेशन हुआ तो मेरा ट्रान्सफर दिल्ली कर दिया गया. हैदराबाद ट्रान्सफर को रद्द करते हुए. लेकिन मुझे लगा कि मैं वहां काम नहीं कर सकता हूं. जिस खबर को लेकर स्थिति बनी थी…सीधे-सीधे तौर पर विवाद हुआ था…सरकार और मैनेजमेंट के बीच यह रास्ता निकला की मुझे यहां से हटा दिया जाए. इसके बाद मैंने खुद रिजाइन करने का फैसला ले लिया.

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कशिश न्यूज़ में अपनी जिम्मेदारियों के बारे में बताएं?

मैं यहां दो साल से हूं. यहां आकर मुझे एक अलग फॉर्मेट में काम करने का मौका मिला है. यहां पर मैं इनपुट हेड हूं. अब मुझे यहां एक मैनेजमेंट के हेड के रूप में काम करने का मौका मिला है. मैनेजमेंट के सेल हैं, मैनेजमेंट एंड हैं, इन सबके बारे में जानकारी रखनी होती है. लेकिन आप पत्रकार नहीं तो इन सबका कोई मतलब नहीं है.

नेशनल मीडिया में आने के बारे में आपने सोचा है?

नहीं. कभी नहीं सोचा. और अगर कभी मौका मिला तो भी मैं नेशनल मीडिया में नहीं जाउंगा. क्योंकि नेशनल मीडिया जिस डायरेक्शन में जा रहा है उससे पत्रकारिता को हानि हो रही है. वह लोग सिर्फ एजेंडा पर ही काम करते हैं. वह सुबह एजेंडा डिसाइड करते हैं. और दिन भर उसी एजेंडे पर रिपोर्ट और डिबेट होते रहती हैं. धीरे-धीरे नेशनल मीडिया में पत्रकारिता का जो स्कोप है जो वह समाप्त होता जा रहा है. जैसे इनवेस्टिंव जर्नलिज्म दो साल पहले तक होता था, उसका कल्चर अब समाप्त होता जा रहा है. तो इन चीजों में जब आपको काम करने का मौका नहीं मिलेगा, तो नौकरी करने का फायदा ही नहीं है. ऐसे तो नौकरी करने के लिए और भी बहुत जगह हैं. माना जाता हैं कि पत्रकारिता नौकरी नहीं है. इसमें जब आप हैं तो अपनी नई चीजे सोसाइटी को दीजिए.

आपने कहा था कि नौकरी पाने के लिए एक डिग्री होना जरूरी है. तो नौकरी पाने के लिए एग्जाम के नंबर कितना मायने रखते हैं?

देखिए सबसे बुरी चीज मीडिया में यह है कि यहां पर रिक्रूटमेंट को लेकर गाइडलाइंस नहीं है. ज्यादा चांसेस यहीं है कि यहां पर आपको नौकरी किसी के सिफारिश से ही मिले. लेकिन ETV जैसे संस्थान भी हैं. जहां पर रिटेन एग्जाम होता है. जिसे पास करके इंटरव्यू फेस करना होता है. लेकिन पत्रकारिता में कितने भी परसेंट हो उसका कोई मतलब नहीं है. लोगों के सामने आप किस तरीके से अपनी बात को रख रहे हैं – यही मैटर करता है. आपने कहां से इंटर्नशिप किया हैं – यह कुछ चीज है जो मायने रखती है.

मीडिया के अभी के हालात के बारे में आप क्या राय रखते हैं?

पत्रकारिता में अब मैनेजमेंट की सोची समझी राजनीति के साथ काम हो रहा है. किसी भी पत्रकार को ब्रांड बनने नहीं दिया जा रहा. रवीश कुमार हो या पुण्य प्रसून बाजपेयी, ऐसे नाम अब आपको आने वाले समय में दिखाई नहीं देंगे. क्योंकि मैनेजमेंट ब्रांड बनने नहीं देना चाहते. पत्रकारिता जगत में ऐसा नहीं होना चाहिए. इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म जैसे चीजों को बढ़ावा देना चाहिए.

पत्रकारिता के तमाम स्टूडेंट को हम शुरुआती दौर में दो किताबें जरूर पढ़ने की सलाह देंगे. यह किसी पत्रकार का लिखा हुआ नहीं है. गांधीजी की आत्मकथा को पढ़िए और हिंद स्वराज पढ़िए. मोस्ट पॉलिटिकल स्टोरी जो आप पॉलिटिकल एंगल से समझना चाहते हैं, आपको इस पुस्तक से मिल जाएगी. यह चीज और किसी पत्रकारिता के किताब में नहीं मिलेगी. जो बच्चे इस फील्ड में आना चाहते हैं उन्हें यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए. इन किताबों में गांधीजी के विचारों को आप अच्छे से समझ सकते हैं. इससे आपको सोसाइटी को समझने का अच्छा मौका मिलेगा.

अब सारी चीजें मोबाइल पर हैं. अब लोगों को इंफॉर्मेशन चाहिए. अब सबसे पहले इंफॉर्मेशन कौन देता है – इसका दौर शुरू हुआ है. पहले पत्रकार विश्लेषन करते थे. पहले लोग विश्लेषन पढ़ते थे. इंफॉर्मेशन के साथ-साथ विश्लेषन. लेकिन अब लोग इंफॉर्मेशन लेते हैं. विशलेषन वे खुद अपने तरीके से करते हैं. सोशल मीडिया के कारण भी यह चीजें बदली है.

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स्टूडेंट्स के लिए आपका मेसेज क्या होगा?

मेरे बीस वर्षों के पत्रकारिता के अनुभव से मैं यही कह सकता हूं कि आप पत्रकारिता में यह सोचकर मत आइएगा कि – हमारा जीवन बहुत सुखमय रहेगा. आप समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो ही आप पत्रकारिता में आइए. ग्लैमर को देखकर पत्रकारिता में भूलकर भी ना आए. आप समाज के लिए काम करने आएंगे तो ग्लैमर वगैरह आपके साथ धीरे-धीरे चलता रहेगा. यह सोच कर आइये की हमें सड़क पड़ भी आना पर सकता है. समझोता नहीं कर सकते तो नौकरी भी गवांनी पड़ सकती है. यह सोच कर आयेंगे तो पत्रकारिता करने में आनंद आएगा और अच्छा पत्रकार भी बन पाएंगे.

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This interview is taken by @alokanand  and Edited by Sridhar. To suggest an interview, feedback, comments, work with us, write at mail@acadman.in